उत्साह का
अथाह सोता है
तुम्हारे भीतर
जिसके सामने
खुद वक़्त भी
हो जाता है नतमस्तक
क्योंकि
तुम्हारी जीवंतता मे तो
वो भी नही पैदा कर सका
एक भी झुर्री
सिनेमा के उस छोर से
इस छोर तक
किसी गाइड की तरह
तुम्हारी उपस्थिति
जीने की जिजीविषा
पैदा करती है
हमारे भीतर
रुपहले पर्दे पर
अपने ही अंदाज़ मे
निभाए हुए
तुम्हारे किरदारों को देखना
हर बार
भर जाता है हमे
आनंद से भरपूर
अनुभवों से
जीवन के
इस अथक प्रेम पुजारी
देव आनंद साहब को
मेरा सलाम
waah waah, farmaish puri karne ke liye shukriya.
ReplyDeleteदेव आनंद साहब को
ReplyDeleteमेरा bhi सलाम
तुम्हारी जीवंतता मे तो
ReplyDeleteवो भी नही पैदा कर सका
एक भी झुर्री
dev sahab ko poori tarah paribhashit kar dene wali panktiyan hain ye yogesh...behad shandar...
ye series acchi chuni tumne.. :)
देव आनंद साहब को मेरा भी सलाम|
ReplyDeletedev sahab padhte to khoooooob khush hote....lovely lines :)
ReplyDeleteवाकई ....वे महान कलाकार हमेशा रहेंगे ! शुभकामनायें!!
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