Monday, January 16, 2012

ताज़ा खबर है

ताज़ा खबर है
कि अब
कच्ची ही रहेंगी
बस्तियों की झोपड़ियाँ
क्योंकि रोक लेंगी
धूप का सारा रास्ता
हर तरफ फैलती हुई
ऊँची इमारतें
अब और भी होंगे पक्के
उनके रंग
सोखकर
ग़रीब बस्तियों के
हिस्से की धूप

ताज़ा खबर है
कि अब
ऊँची इमारतों की छत पर
खुदा की खातिर बनेगे
हैलीपैड
सुना है कि खुदा
अब पाँव नही करेगा मैले
धूल और कीचड़ से सनी
संकरी गलियों मे जाकर

ताज़ा खबर है
कि नयी व्यवस्था मे
अब कोई नही होगा
मसीहा
कमज़ोरों का

4 comments:

  1. hmm.... acchi kavita hui hai.....shayad ye sthiti aa hi chuki hai..........

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  2. सुना है कि खुदा
    अब पाँव नही करेगा मैले
    धूल और कीचड़ से सनी
    संकरी गलियों मे जाकर

    Waah Yogesh bhai! Maza aa gaya padh ke! :)

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  3. BASTIYON KO KACCHI HI REHNE DO........NAHI TO BANANE UJADNE KA SILSILA YAHIN THAM JAAYEGA.........AUR PHIR DHOOP KE INTEZAAR MEIN.....SULAGTE RAHENGE MAN YUN HI....UMAR BHAR.

    NICE ONE.....KEEP IT UP DEEPU.......

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  4. nice piece of poetry... bitter truth though...

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